Linga Mudra/लिंग मुद्रा के विधि और लाभ !!


Linga Mudra

Linga Mudra

लिंग मुद्रा के विधि और लाभ !

लिंग मुद्रा के विधि :

1.किसी भी ध्यानात्मक आसन में बैठ जाएँ |

2.दोनों हाथों की अँगुलियों को परस्पर एक-दूसरे में फसायें (ग्रिप बनायें)

3.किसी भी एक अंगूठे को सीधा रखें तथा दूसरे अंगूठे से सीधे अंगूठे के पीछे से लाकर घेरा बना दें |

लिंग मुद्रा के सावधानियाँ :

1.लिंग मुद्रा से शरीर मे गर्मी उत्पन्न होती है, इसलिए इस मुद्रा को करने के पश्चात् यदि गर्मी महसूस हो तो तुरंत पानी पी लेना चाहिए |

2.लिंग मुद्रा को नियत समय से अधिक नही करना चाहिए अन्यथा लाभ के स्थान पर हानि संभव है |

3.गर्मी के मौसम में इस मुद्रा को अधिक समय तक नहीं करना चाहिए |

4.पित्त प्रकृति वाले व्यक्तियों को लिंग मुद्रा नही करनी चाहिए |

लिंग मुद्रा करने का समय व अवधि :

1.लिंग मुद्रा को प्रातः-सायं 16-16 मिनट तक करना चाहिए |

लिंग मुद्रा के चिकित्सकीय लाभ :

1.सर्दी से ठिठुरता व्यक्ति यदि कुछ समय तक लिंग मुद्रा कर ले तो आश्चर्यजनक रूप से उसकी ठिठुरन दूर हो जाती है |

2.लिंग मुद्रा के अभ्यास से जीर्ण नजला, जुकाम, साइनुसाइटिस, अस्थमा व निमन् रक्तचाप का रोग नष्ट हो जाता है | इस मुद्रा के नियमित अभ्यास से कफयुक्त खांसी एवं छाती की जलन नष्ट हो जाती है |

3.यदि सर्दी लगकर बुखार आ रहा हो तो लिंग मुद्रा तुरंत असरकारक सिद्ध होती है |

4.लिंग मुद्रा के नियमित अभ्यास से अतिरिक्त कैलोरी बर्न होती हैं परिणाम स्वरुप मोटापा रोग समाप्त हो जाता है |

5.लिंग मुद्रा पुरूषों के समस्त यौन रोगों में अचूक है । इस मुद्रा के प्रयोग से स्त्रियों के मासिक स्त्राव सम्बंधित अनियमितता ठीक होती हैं |

6.लिंग मुद्रा के अभ्यास से टली हुई नाभि पुनः अपने स्थान पर आ जाती हैं |

लिंग मुद्रा के आध्यात्मिक लाभ :

1.यह मुद्रा पुरुषत्व का प्रतीक है इसीलिए इसे लिंग मुद्रा कहा जाता है। लिंग मुद्रा के अभ्यास से साधक में स्फूर्ति एवं उत्साह का संचार होता है |

2.यह मुद्रा ब्रह्मचर्य की रक्षा करती है, व्यक्तित्व को शांत व आकर्षक बनाती है जिससे व्यक्ति आन्तरिक स्तर पर प्रसन्न रहता है ।

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