शरद पूर्णिमा

Sharad Purnima

शरद पूर्णिमा विशेष : चन्द्र-दर्शन शुभ 

शरद पूर्णिमा 05 अक्टूबर  2017 गुरुवार को है ।

आश्विन पूर्णिमा को ‘शरद पूर्णिमा’ बोलते हैं । इस दिन रास-उत्सव और कोजागर व्रत किया जाता है । गोपियों को शरद पूर्णिमा की रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण ने बंसी बजाकर अपने पास बुलाया और ईश्वरीय अमृत का पान कराया था । अतः शरद पूर्णिमा की रात्रि का विशेष महत्त्व है । इस रात को चन्द्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ पृथ्वी पर शीतलता, पोषक शक्ति एवं शांतिरूपी अमृतवर्षा करता है ।

इस रात्रि में ध्यान-भजन, सत्संग कीर्तन, चन्द्रदर्शन आदि शारीरिक व मानसिक आरोग्यता के लिए अत्यन्त लाभदायक हैं।

एक दिन की सावधानी वर्षभर की प्रसन्नता और आरोग्य का टॉनिक मिल जायेगा ।

पूर्णिमा के योग में यहां बताए जा रहे उपाय करेंगे तो देवी-देवताओं की कृपा से आपका बुरा समय दूर हो सकता है।  ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन में कौन-कौन से उपाय किए जा सकते हैं, जिनसे बुरा समय और पैसों की कमी दूर हो सकती है…

धन संबंधी परेशानियां दूर करने का उपाय

1.शरद पूर्णिमा की रात में महालक्ष्मी का पूजन करना चाहिए और महालक्ष्मी के मंत्र का जप करना चाहिए। मंत्र जप कम से कम 108 बार करें। इसके लिए कमल के गट्टे की माला से जप करना चाहिए।

मंत्र-ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मयै नम:”।

2.शरद पूर्णिमा की शाम को मां लक्ष्मी की पूजा करें। मां लक्ष्मी के चरणों में 7 कौड़ियां रखें। रात्रि 12 बजे के बाद इन कौड़ियों को धर में गाड़ दें। इससे जल्दी ही आपकी धन संबंधी समस्याएं समाप्त हो सकती ही।

3.पूर्णिमा को लक्ष्मी के मंदिर में कमल गट्टे की माला अर्पित करें। इस उपाय से मां लक्ष्मी आप पर जरुर प्रसन्न होगी।

4.लक्ष्मी पूजा में चांदी का सिक्का भी रखें। बाद में इन्हें अपनी तिजोरी में रख दें। आपकी तिजोरी पैसों से भरी रहेगी।

5.पूर्णिमा को लक्ष्मी मंदिरमें में जाएं और मां लक्ष्मी को कमल के फूल व सफेद मिठाई अर्पित करें। इससे धन लाभ के योग बनेंगा।

6.पूर्णिमा को शंख में केसर मिला दूध भरकर भगवान विष्णु का अभिषेक करें। इससे भी मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और साधक को मालामाल कर देती हैं।

7.पूर्णिमा को धर के ईशान कोण में गाय का धी का दीपक लगाएं। उसमें थोड़ी केसर भी डालें। इससे रुका हुआ धन आने के योग बनते हैं।

8.पूर्णिमा को पीपल के पेड़ के पास पंचमुखी दीपक लगाएं और मां लक्ष्मी से धन प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें। यह चमत्कारी उपाय है।

9.आप कर्जे से परेशान हैं तो किसी लक्ष्मी मंदिर से पानी लाकर पीपल के वृक्ष पर चढ़ा दें। जल्दी ही आपका कर्ज उतर जाएगा।

10.पूंजी खर्च हो रही है तो पीपल के 5 पतों को पीले चंदन में रंगकर बहते हुए जल में बहा दें। जमा पूंजी लगातार बढ़ती रहेगी।

शरद पूनम की रात को क्या करें, क्या न करें ?

1.दशहरे से शरद पूनम तक चन्द्रमा की चाँदनी में विशेष हितकारी रस, हितकारी किरणें होती हैं । इन दिनों चन्द्रमा की चाँदनी का लाभ उठाना, जिससे वर्षभर आप स्वस्थ और प्रसन्न रहें । नेत्रज्योति बढ़ाने के लिए दशहरे से शरद पूर्णिमा तक प्रतिदिन रात्रि में 15 से 20 मिनट तक चन्द्रमा के ऊपर त्राटक करें ।

2.इस रात को हजार काम छोड़कर 15 मिनट चन्द्रमा को एकटक निहारना। एक-आध मिनट आँखें पटपटाना। कम-से-कम 15 मिनट चन्द्रमा की किरणों का फायदा लेना, ज्यादा करो तो हरकत नहीं। इससे 32 प्रकार की पित्तसंबंधी बीमारियों में लाभ होगा, शांति होगी।

3.अश्विनी कुमार देवताओं के वैद्य हैं । जो भी इन्द्रियाँ शिथिल हो गयी हों, उनको पुष्ट करने के लिए चन्द्रमा की चाँदनी में खीर रखना और भगवान को भोग लगाकर अश्विनी कुमारों से प्रार्थना करना कि ‘हमारी इन्द्रियों का बल-ओज बढ़ायें ।’ फिर वह खीर खा लेना ।

4.फिर छत पर या मैदान में विद्युत का कुचालक आसन बिछाकर लेटे-लेटे भी चंद्रमा को देख सकते हैं।

5.जिनको नेत्रज्योति बढ़ानी हो वे शरद पूनम की रात को सूई में धागा पिरोने की कोशिश करें।

6.शरद पूनम दमे की बीमारीवालों के लिए वरदान का दिन है । अपने आश्रमों में निःशुल्क औषधि मिलती है, वह चन्द्रमा की चाँदनी में रखी हुई खीर में मिलाकर खा लेना और रात को सोना नहीं । दमे का दम निकल जायेगा ।

7.चन्द्रमा की चाँदनी गर्भवती महिला की नाभि पर पड़े तो गर्भ पुष्ट होता है । शरद पूनम की चाँदनी का अपना महत्त्व है लेकिन बारहों महीने चन्द्रमा की चाँदनी गर्भ को और औषधियों को पुष्ट करती है ।

8.अमावस्या और पूर्णिमा को चन्द्रमा के विशेष प्रभाव से समुद्र में ज्वार-भाटा आता है । जब चन्द्रमा इतने बड़े दिगम्बर समुद्र में उथल-पुथल कर विशेष कम्पायमान कर देता है तो हमारे शरीर में जो जलीय अंश है, सप्तधातुएँ हैं, सप्त रंग हैं, उन पर भी चन्द्रमा का प्रभाव पड़ता है । इन दिनों में अगर काम-विकार भोगा तो विकलांग संतान अथवा जानलेवा बीमारी हो जाती है और यदि उपवास, व्रत तथा सत्संग किया तो तन तंदुरुस्त, मन प्रसन्न और बुद्धि में बुद्धिदाता का प्रकाश आता है ।

खीर को बनायें अमृतमय प्रसाद

खीर को रसराज कहते हैं । सीताजी को अशोक वाटिका में रखा गया था । रावण के घर का क्या खायेंगी सीताजी ! तो इन्द्रदेव उन्हें खीर भेजते थे ।

शरद पूर्णिमा की रात को आप भोजन नहीं बनायेंगे ।  घर में केवल चावल पका देंगे, पानी में जैसे चावल पकते हैं फिर उसमें दूध डाल देंगे । एक-दो उफान आ जाये, बन गयी खीर । ज्यादा उबालकर दूध को गाढ़ा करने से पाचन पर लोड पड़ता है ।

चावल, दूध और मिश्री की खीर बनायें । खीर बनाते समय उसमें कुछ समय के लिए थोड़ा सोना या चाँदी मिला दें ।

खीर बनाते समय घर में चाँदी का गिलास आदि जो बर्तन हो, आजकल जो मेटल (धातु) का बनाकर चाँदी के नाम से देते हैं वह नहीं, असली चाँदी के बर्तन अथवा असली सोना धो-धा के खीर में डाल दो तो उसमें रजतक्षार या सुवर्णक्षार आयेंगे । लोहे की कड़ाही अथवा पतीली में खीर बनाओ तो लौह तत्त्व भी उसमें आ जायेगा ।

इलायची, खजूर या छुहारा डाल सकते हो लेकिन बादाम, काजू, पिस्ता, चारोली ये रात को पचने में भारी पड़ेंगे ।

रात्रि 9:00 बजे महीन कपड़े से ढँककर चन्द्रमा की चाँदनी में रखी हुई खीर 12:00 बजे के आसपास भगवान को भोग लगा के प्रसादरूप में खा लेनी चाहिए ।

खीर को कम से कम 2 घंटे के लिए चन्द्रमा के प्रकाश में रख दें । उस दिन के लिए कोई अन्य भोजन नहीं पकाएं, केवल खीर खाएं । हमें देर रात को भारी आहार नहीं लेना चाहिए इसलिए  खीर खाएं । शरद पूनम की रात में रखी गयी खीर को पूज्य गुरुदेव को भोग लगाने के बाद अगले दिन प्रसाद रूप में नाश्ते में भी ले सकते हैं ।

लेकिन देर रात को खाते हैं इसलिए थोड़ी कम खाना और खाने से पहले एकाध चम्मच मेरे हवाले भी कर देना । मुँह अपना खोलना और भाव करना : ‘लो महाराज ! आप भी लगाओ भोग ।’ और थोड़ी बच जाय तो फ्रिज में रख देना । सुबह गर्म करके खा सकते हो ।

(खीर दूध, चावल, मिश्री, चाँदी, चन्द्रमा की चाँदनी – इन पंचश्वेतों से युक्त होती है, अतः सुबह बासी नहीं मानी जाती ।)

 

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