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🌹Goddess Saraswati Devi🌹

Goddess Saraswathi is the consort of Lord Brahma and is the Goddess of wisdom and learning. Goddess Saraswathi is considered as the personification of all knowledge. Her presence is elegant and she is depicted as wearing a pure white sari and seated on a white lotus representing purity and brilliance. Goddess Saraswathi carries a Veena which represents mastery over the physical organs and actions where the veena is symbolic for life and strings are symbolic of feelings. The book she carries is symbolic of knowledge. The white swan, lotus, cloths and white ornaments are symbolic of her chastity and purity. Goddess Saraswathi is said to possess the powers of speech, wisdom and learning. The Saraswathi Chalisa is one of the most powerful prayer in the world. Students and people in profession related to studying or books or wisdom or knowledge must seek her blessings, this powerful prayer is beneficial to those seeking pure and divine knowledge.

हिन्दू धर्म में देवी सरस्वती को ज्ञान, साहित्य, कला और स्वर की देवी माना जाता है। इन्हें श्वेत रंग अतिप्रिय है। सरस्वती जी का वर्णन ब्रह्मा जी की मानस पुत्री के रूप में है लेकिन कई स्थानों पर इन्हें ब्रह्मा जी की पत्नी के रूप में भी दिखाया गया है। हर वर्ष की माघ शुक्ल पंचमी अर्थात वसंत पंचमी को देवी सरस्वती की विशेष पूजा अर्चना की जाती है।

🌹देवी सरस्वती की जन्म कथा (Birth Story of Devi Saraswati) 🌹 

एक कथा के अनुसार जब ब्रह्मा जी ने जगत की रचना की, उस समय पृथ्वी पर चारों तरफ उदासी का वातावरण छाया हुआ था। पृथ्वी के वातावरण को मंगलमय बनाने का विचार करते हुए ब्रह्मा जी के मुख से एक सुंदर स्त्री का जन्म हुआ। इस स्त्री के हाथ में वीणा था, जैसे ही स्त्री ने वीणा बजाना शुरू किया पूरी पृथ्वी लहलहा उठी। तभी से उस दिन को वसंत पंचमी के रुप में मनाया जाने लगा।

🌹देवी सरस्वती का स्वरूप (Incarnation  of Devi Saraswati)🌹

शास्त्रों और पुराणों के अनुसार देवी सरस्वती बहुत ही शांत स्वभाव की हैं। उनके चार हाथ है जिसमें से एक हाथ में माला और एक हाथ में वेदों को धारण किया हुआ है, जबकि दो अन्य हाथों से देवी ने वीणा पकड़ा हुआ है। इनके गले में श्वेत रंग की माला है तथा इनके वस्त्र भी श्वेत हैं। देवी सरस्वती का वाहन मोर हैं।

🌹सरस्वती जी का परिवार (Family of Devi Saraswati) 🌹 

सरस्वती पुराण के अनुसार सरस्वती जी का जन्म ब्रह्मा के मुख से हुआ था। देवी सरस्वती के अद्भुत रूप को देखकर ब्रह्मा जी ने उनसे विवाह कर लिया। ब्रह्मा जी और देवी सरस्वती का एक पुत्र भी है जिसे “स्वयंभु मनु” के नाम से जाना जाता है।

🌹ब्रह्माजी और सरस्वती देवी का संबंध (Relation Between Lord Bramha & Devi Saraswati)🌹

हिन्दू धर्मानुसार ब्रह्मा जी द्वारा उत्पन्न किए जाने के कारण यूं तो देवी सरस्वती उनकी पुत्री हुई लेकिन भाग्यवश ब्रह्माजी को ही सरस्वती देवी का पति माना जाता है। माना जाता है कि अपनी ही पुत्री से विवाह करने और उस पर कुदृष्टि डालने के कारण ब्रह्माजी की पूजा अन्य देवों की तरह नहीं होती। कई जगह यह बात भी लिखी गई है कि सरस्वती जी ने ही ब्रह्माजी को वेदों का ज्ञान सिखाया था।

🌹देवी सरस्वती का मंत्र (Mantra of Devi Saraswati)🌹

सरस्वती जी की पूजा के लिए अष्टाक्षर मूल मंत्र श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा परम श्रेष्ठतम और उपयोगी माना जाता है। साथ ही सरस्वती जी को प्रसन्न करने तथा विद्या प्राप्ति के लिए इस मंत्र का भी प्रयोग किया जाता है:  ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः

 

🌹देवी सरस्वती से जुड़ी महत्त्वपूर्ण बातें (Facts of Devi Saraswati)🌹

  1.  सरस्वती जी का विवाह आपने पिता ब्रह्मा जी से हुआ था।
  2.  उनका वाहन मोर है।
  3.  देवी सरस्वती स्वर और विद्या की देवी हैं।
  4.  विष्णु जी के श्राप के कारण ही देवी सरस्वती, सरस्वती नदी बनी थी।

🌹देवी सरस्वती के अन्य नाम (Other Name of Devi Saraswati)  🌹 

  • शारदा
  • शतरूपा
  • वाणी
  • वाग्देवी
  • वागेश्वरी
  • भारती
  • कौशिकी

🌹देवी सरस्वती के प्रमुख मंदिर (Famous Temples of Devi Saraswati)🌹

  1. शारदा मंदिर (मैहर)
  2. सरस्वती मंदिर (पुष्कर)
  3. श्रृंगेरी मंदिर
  4. सरस्वती मंदिर (कोट्टयम)
  5. श्री ज्ञान सरस्वती मंदिर (निजामाबाद)

🌹श्री सरस्वती प्रार्थना (Shri Saraswati Prathana in Hindi)🌹

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृताया
वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभि र्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥1॥

जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के
फूल, चंद्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह
धवल वर्ण की हैं और जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं,
जिनके हाथ में वीणादण्ड शोभायमान है,
जिन्होंने श्वेत कमलों पर आसन ग्रहण किया
है तथा ब्रह्मा, विष्णु एवं शंकर आदि देवताओं
द्वारा जो सदा पूजित हैं, वही संपूरण जड़ता
और अज्ञान को दूर कर देने वाली
माँ सरस्वती हमारी रक्षा करें॥1॥

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां
जगद्व्यापिनींवीणापुस्तकधारिणीमभयदां
जाड्यान्धकारापहाम्हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं
पद्मासने संस्थिताम्वन्दे तां परमेश्वरीं
भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥2॥

शुक्लवर्ण वाली, संपूर्ण चराचर जगत्में व्याप्त,
आदिशक्ति, परब्रह्म के विषय में किए गए विचार एवं
चिंतन के सार रूप परम उत्कर्ष को धारण करने वाली,
सभी भयों से भयदान देने वाली,
अज्ञान के अँधेरे को मिटाने वाली, हाथों में वीणा,
पुस्तक और स्फटिक की माला धारण करने वाली
और पद्मासन पर विराजमान् बुद्धि प्रदान करने वाली,
सर्वोच्च ऐश्वर्य से अलंकृत, भगवती शारदा
(सरस्वती देवी) की मैं वंदना करता हूँ॥

🌹वसंत पंचमी को होती है सरस्वती पूजा (Worship of Devi Saraswati At Vasant Panchami)🌹

वसंत पंचमी के दिन विशेष रूप से सरस्वती पूजा करने का विधान है। इस दिन मुख्यतः देवी सरस्वती की पूजा ज्ञान, बुद्धि और कला की प्राप्ति के लिए किया जाता है। देवी सरस्वती हिन्दू धर्म की देवी हैं। इन्हें साहित्य, कला और स्वर की देवी माना जाता है। हर वर्ष की माघ शुक्ल पंचमी अर्थात वसंत पंचमी को देवी सरस्वती की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। स्वंय भगवान श्री कृष्ण ने सर्वप्रथम सरस्वती जी की पूजा की थी। इन्हें श्वेत रंग अतिप्रिय है। तो आइए पढ़ें ज्ञान की देवी सरस्वती जी के कुछ आसान मंत्र:

🌹सरस्वती मंत्र (Saraswati Mantra in Hindi)🌹
देवी सरस्वती का मूल मंत्र निम्न है: ॐ ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः।
संपूर्ण सरस्वती मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः।

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🌹परीक्षा भय निवारण हेतु (Saraswati Mantra for Exams in Hindi)🌹
परीक्षा में डर ना लगें इसलिए इन मंत्रों का जाप करना लाभदायक माना जाता है
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वीणा पुस्तक धारिणीम् मम् भय निवारय निवारय अभयम् देहि देहि स्वाहा।
Om Ahem Hreem Shreem Veena Pustak Dharinim Mam Bhay Nivaranya Nivaranya abhyam dehi dehi swaha.

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🌹स्मरण शक्ति बढाने के लिए मंत्र (Saraswati Mantra for Memory Power in Hindi)🌹
याद करने की क्षमता बढ़ाने के लिए इस मंत्र को फलदायक माना जाता है:

ऐं नमः भगवति वद वद वाग्देवि स्वाहा।
Om Namah Bhagwati Vad Vad Vagdevi Swaha

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उच्च शिक्षा और बुद्धिमत्ता के लिए सरस्वती देवी के इन मंत्रों का जाप करना चाहिए:

शारदा शारदाभौम्वदना। वदनाम्बुजे।
सर्वदा सर्वदास्माकमं सन्निधिमं सन्निधिमं क्रिया तू।

Sarada Saradabhaumvadana Vadanambuje
Sarvada sarvadasmakamam sannidhimam sannidhimam kriya tu

श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा।
ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः।

Srim hrim sarasvatyai svaha.
Hrim aim hrim sarasvatyai namah

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कला और साहित्य के क्षेत्र में सफलता के लिए इस मंत्र का जाप करना चाहिए:

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमां आद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा पुस्तक धारिणीं अभयदां जाड्यान्धकारापाहां|
हस्ते स्फाटिक मालीकां विदधतीं पद्मासने संस्थितां
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धि प्रदां शारदां||

Shuklaam Brahmavichaara Saara paramaam Aadhyaam Jagadvyapinim,
Veena Pustaka Dhaarineem Abhayadaam Jaadya’andhakaara’apahaam
Haste Sphaatika Maalikam Vidadhateem Padmasane Sansthitaam
Vande taam Parmeshwareem Bhagavateem Buddhipradaam Shardam

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🌹सरस्वती मंत्र (Powerful Saraswati Mantra in Hindi)🌹

सभी बाधाओं के निवारण के लिए देवी सरस्वती के इस मंत्र का जाप करना चाहिए।

ऐं ह्रीं श्रीं अंतरिक्ष सरस्वती परम रक्षिणी
मम सर्व विघ्न बाधा निवारय निवारय स्वाहा।

Aim hrim Srim antariksa sarasvati parama rakshini
mama sarva vighna badha nivaraya nivaraya svaha

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🌹श्री सरस्वती चालीसा (Shri Saraswati Chalisa in Hindi)🌹

॥दोहा॥

जनक जननि पद्मरज, निज मस्तक पर धरि।
बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥
पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु।
दुष्जनों के पाप को, मातु तु ही अब हन्तु॥

॥चालीसा॥

जय श्री सकल बुद्धि बलरासी।जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी॥
जय जय जय वीणाकर धारी।करती सदा सुहंस सवारी॥1

रूप चतुर्भुज धारी माता।सकल विश्व अन्दर विख्याता॥
जग में पाप बुद्धि जब होती।तब ही धर्म की फीकी ज्योति॥2

तब ही मातु का निज अवतारी।पाप हीन करती महतारी॥
वाल्मीकिजी थे हत्यारा।तव प्रसाद जानै संसारा॥3

रामचरित जो रचे बनाई।आदि कवि की पदवी पाई॥
कालिदास जो भये विख्याता।तेरी कृपा दृष्टि से माता॥4

तुलसी सूर आदि विद्वाना।भये और जो ज्ञानी नाना॥
तिन्ह न और रहेउ अवलम्बा।केव कृपा आपकी अम्बा॥5

करहु कृपा सोइ मातु भवानी।दुखित दीन निज दासहि जानी॥
पुत्र करहिं अपराध बहूता।तेहि न धरई चित माता॥6

राखु लाज जननि अब मेरी।विनय करउं भांति बहु तेरी॥
मैं अनाथ तेरी अवलंबा।कृपा करउ जय जय जगदंबा॥7

मधुकैटभ जो अति बलवाना।बाहुयुद्ध विष्णु से ठाना॥
समर हजार पाँच में घोरा।फिर भी मुख उनसे नहीं मोरा॥8

मातु सहाय कीन्ह तेहि काला।बुद्धि विपरीत भई खलहाला॥
तेहि ते मृत्यु भई खल केरी।पुरवहु मातु मनोरथ मेरी॥9

चंड मुण्ड जो थे विख्याता।क्षण महु संहारे उन माता॥
रक्त बीज से समरथ पापी।सुरमुनि हदय धरा सब काँपी॥10

काटेउ सिर जिमि कदली खम्बा।बारबार बिन वउं जगदंबा॥
जगप्रसिद्ध जो शुंभनिशुंभा।क्षण में बाँधे ताहि तू अम्बा॥11

भरतमातु बुद्धि फेरेऊ जाई।रामचन्द्र बनवास कराई॥
एहिविधि रावण वध तू कीन्हा।सुर नरमुनि सबको सुख दीन्हा॥12

को समरथ तव यश गुन गाना।निगम अनादि अनंत बखाना॥
विष्णु रुद्र जस कहिन मारी।जिनकी हो तुम रक्षाकारी॥13

रक्त दन्तिका और शताक्षी।नाम अपार है दानव भक्षी॥
दुर्गम काज धरा पर कीन्हा।दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा॥14

दुर्ग आदि हरनी तू माता।कृपा करहु जब जब सुखदाता॥
नृप कोपित को मारन चाहे।कानन में घेरे मृग नाहे॥15

सागर मध्य पोत के भंजे।अति तूफान नहिं कोऊ संगे॥
भूत प्रेत बाधा या दुःख में।हो दरिद्र अथवा संकट में॥16

नाम जपे मंगल सब होई।संशय इसमें करई न कोई॥
पुत्रहीन जो आतुर भाई।सबै छांड़ि पूजें एहि भाई॥17

करै पाठ नित यह चालीसा।होय पुत्र सुन्दर गुण ईशा॥
धूपादिक नैवेद्य चढ़ावै।संकट रहित अवश्य हो जावै॥18

भक्ति मातु की करैं हमेशा। निकट न आवै ताहि कलेशा॥
बंदी पाठ करें सत बारा। बंदी पाश दूर हो सारा॥19

रामसागर बाँधि हेतु भवानी।कीजै कृपा दास निज जानी।20

॥दोहा॥

मातु सूर्य कान्ति तव, अन्धकार मम रूप।
डूबन से रक्षा करहु परूँ न मैं भव कूप॥
बलबुद्धि विद्या देहु मोहि, सुनहु सरस्वती मातु।
राम सागर अधम को आश्रय तू ही देदातु॥

🌹Lyrics🌹

Doha

Janak Janani Pad Kamal Raj, Nij Mastak Par Dhaari,
Bandau Maatu Saraswati, Buddhi Bal De Daataari.
Purn Jagat Mein Vyaapt Tav, Mahima Amit Anantu,
Ramsaagar Ke Paap Ko, Maatu Tuhi Ab Hantu.Jay Shri Sakal Buddhi Balaraasi, Jay Sarvagya Amar Avinaasi.
Jay Jay Veenaakar Dhaari, Karati Sadaa Suhans Savaari.
 
Roop Chaturbhujadhaari Maata, Sakal Vishv Andar Vikhyaata.
Jag Mein Paap Buddhi Jab Hoti, Jabahi Dharm Ki Phiki Jyoti.
 
Tabahi Maatu Le Nij Avataara, Paap Heen Karati Mahi Taara.
Baalmiki Ji The Baham Gyaani, Tav Prasaad Janie Sansaara.
 
Raamaayan Jo Rache Banaai, Aadi Kavi Ki Padavi Paai.
Kalidaas Jo Bhaye Vikhyaata, Teri Kripaa Drishti Se Maata.
 
Tulasi Sur Aadi Vidvaana, Bhaye Aur Jo Gyaani Nana.
Tinhahi Na Aur Raheu Avalamba, Keval Kripa Aapaki Amba.
 
Karahu Kripa Soi Maatu Bhavaani, Dukhit Din Nij Daasahi Jaani.
Putra Karai Aparaadh Bahuta, Tehi Na dharai Chitt Sundar Maata.
 
Raakhu Laaj Janani Ab Meri, Vinay Karu Bahu Bhaanti Ghaneri.
Mein Anaath Teri Avalamba, Kripa Karau Jay Jay Jagadamba.
Madhu Kaitabh Jo Ati Balavaana, Baahuyuddh Vishnu Te Thaana.
Samar Hajaar Paanch Mein Ghora, Phir Bhi Mukh Unase Nahi Mora.
 
Maatu Sahaay Bhai Tehi Kaala, Buddhi Viparit Kari Khalahaala.
Tehi Mrityu Bhai Khal Keri, Purvahu Maatu Manorath Meri.
 
Chand Mund Jo The Vikhyaata, Chhan Mahu Sanhaareu Tehi Maata.
Raktabij Se Samarath Paapi, Sur-Muni Hriday Dhara Sab Kampi.
 
Kaateu Sir Jim Kadali Khamba, Baar Baar Binavau Jagadamba.
Jag Prasidhdh Jo Shumbh Nishumbha, Chhin Me Badhe Taahi Tu Amba.
 
Bharat-Maatu Budhi Phereu Jaai, Ramachandra Banvaas Karaai.
Ehi Vidhi Raavan Vadh Tum Kinha, Sur Nar Muni Sab Kahu Sukh Dinha.
 
Ko Samarath Tav Yash Gun Gaana, Nigam Anaadi Anant Bakhaana.
Vishnu Rudra Aj Sakahi Na Maari, Jinaki Ho Tum Rakshaakaari.
Rakt Dantika Aur Shataakshi, Naam Apaar Hai Daanav Bhakshi.
Durgam Kaaj Dhara Par Kinha, Durga Naam Sakal Jag Linha.
 
Durg Aadi Harani Tu Maata, Kripa Karahu Jab Jab Sukhadaata.
Nrip Kopit Jo Maaran Chaahei, Kaanan Mein Ghere Mrig Naahei.
 
Saagar Madhy Pot Ke Bhange, Ati Toofaan Nahi Kou Sange.
Bhoot Pret Baadha Yaa Dukh Mein, Ho Daridra Athava Sankat Mein.
 
Naam Jape Mangal Sab Koi, Sanshay Isame Karai Na Koi.
Putrahin Jo Aatur Bhaai, Sabei Chhaandi Puje Ehi Maai.
 
Karai Path Nit Yah Chaalisa, Hoy Putra Sundar Gun Isa.
Dhupaadik Naivedy Chadhavei, Sankat Rahit Avashy Ho Jaavei.
 
Bhakti Maatu Ki Karei Hamesha, Nikat Na Aavei Taahi Kalesha.
Bandi Path Kare Shat Baara, Bandi Paash Door Ho Saara.
 

Karahu Kripa Bhavamukti Bhavaani, Mo Kahn Daas Sadaa Nij Jaani.

Doha

Maata Sooraj Kaanti Tav, Andhakaar Mam Roop,
Dooban Te Raksha Karahu, Paru Na Mein Bhav-Koop.
Bal Buddhi Vidya Dehu Mohi, Sunahu Sarasvati Maatu,
Adham Ramasaagarahi Tum, Aashray Deu Punaatu.

🌹Meaning🌹

Doha
 
The feet of the mother and father are ruling the lotusAnd I hold it on my head,
I salute the mother Saraswathi, who grants wisdom and strength,
Your power is spread all over the world and is endless and immeasurable,
Oh mother, only you can mitigate all the sins that I have done.
 
Victory to she who is the strength of wisdom, victory to the indestructible god, who knows everything,
Victory to her, who holds Veena in her hand, who always travels on a divine swan.
 
Whose form is the four armed mother, who is famous all over the world,
In this world when there is a sinful thought, then comes the  tasteless flame of Dharma.
 
Then the mother will take an incarnation, and she would make us sinless stars,
Through your blessings people knew about, the great wise sage called Valmiki,
 
And the Ramayana was written by him, and he was called the primeval poet.
Oh mother, through your merciful look, Kalidas became very famous.
 
Thulasidas and Surdas became wise men, 
And did not have any one else but you to support, Oh mother this is definitely your mercy.
 
Mercy is shown by her who is mother Bhavani, And this is known  and real devotees will know
The son does lot of mistakes, But you wear a mind that is pretty, mother.
 
Oh mother now I am keeping this shame of mine, And humbly salute you in various ways,
I am endlessly dependent on you, Please show me your mercy, Oh mother of the world.
 
The asuras Madhu and Kadidab were extremely powerful, And they wrestled with Maha Vishnu till he was tested,
And the  horrible war went on for thousands of years, But still Lord Vishnu was not able to defeat them.
 
Oh mother, At last Lord Vishnu requested for help, And told That I did not do it earlier because of ignorance,
For the death  of these brothers has to come by you only, And I should have expressed this wish to you earlier.
 
Within a second  in the war, Oh mother you killed, Chanda and Munda who were very famous warriors,
There was The great sinner called Raktha Bheeja, And hearing about him, devas and sages shivered with fear.
 
And Oh mother cut off his head very easily,And again and again you did this, Oh mother of universe,
The Shumbh and Nishumbh  who were world renowned, And Oh mother you killed them both within no time.
 
The mind of the mother of Bharatha was spoiled, And Sri Ramahandra went and lived in the forest,
And  due to this, you made the death of Ravana happen, And this is being told  by all devas, men and sages.
 
Without singing your praise  none becomes able, Is the conclusion drawn from time immemorial,
And for this Lord Vishnu and  Lord Shiva are witness, For you are the patron who protects them also.
 
You are called as Rakth Danthika and Sathakshi, And this was because you ate very many asuras,
To  those  who take the name of Durga in this world, There are never any problems  in this world.
 
You are the destroyer of difficulties in this world, Oh mother, Please take mercy on us as and when we need , oh giver of joy .
When the king became angry and wanted to kill, Or in the Forest where very cruel animals are there,
 
Or when one is stranded in the middle of the ocean, Or when we re caught in a furious cyclone,
Or when we are tortured by devils and ghosts, Or in poverty or when we are sad,
 
On Chanting the her names all good would happen, And there need not be any doubt about his,
For a ll those who do not have sons or if they are in danger, The only method  for all of them is Worship of Chandi.
 
By reading this forty verse prayer daily, One would get a pretty son with good character,
By offering incense  and Naivedhya to her, They would definitely get rid of their sorrow.
 
Be always show devotion to mother, And then problems will never come close to you,
If the imprisoned one reads this seven times, All the ties binding him will go far away.
 
The goddess Bhavani is like the Ocean of Rama, And would always  show mercy to her devotes.
 
Doha
 
Mother you shine like the Sun God, And darkness is my real form,
Please save me from drowning, So that I can cross this well of miseries,
I desire that you give me strength, wisdom and knowledge, And please hear my prayer, oh mother Saraswathi,
You are the immeasurable ocean of Rama, And only you can be depended upon to cross it.

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