भोजन

                                          🌹 भोजन  🌹  

🌹 जो सिर पर पगड़ी या टोपी रख के, दक्षिण की ओर मुख करके अथवा जूते पहन कर भोजन करता है, उसका वह सारा भोजन आसुरी समझना चाहिए।

(महाभारत, अनुशासन पर्वः 90.19)

🌹 जो सदा सेवकों और अतिथियों के भोजन कर लेने के पश्चात् ही भोजन करता है, उसे केवल अमृत भोजन करने वाला (अमृताशी) समझना चाहिए।

 (महाभारत, अनुशासन पर्वः 93.13)

🌹 भोजन के बीच-बीच में गुनगुना पानी पीना पुष्टिदायक है और भोजन के एक घंटे के बाद पानी पीना अमृततुल्य माना जाता है। प्रायः भोजन के बीच एक ग्लास (250 मि.ली.) पानी पीना पर्याप्त है।

🌹 जब बायाँ नथुना चल रहा हो तो तभी पेय पदार्थ पीने चाहिए। दायाँ स्वर चालू हो उस समय यदि पेय पदार्थ पीना पड़े तो दायाँ नथुना बंद करके बायें नथुने से श्वास लेते हुए ही पीना चाहिए।

🌹 साँस का दायाँ स्वर चलता हो तब भोजन और बायें स्वर के चलते समय पेय पदार्थ लेना स्वास्थ्य के लिए हितकर है।

            …. 🙏🏻 🙏🏻 ….

Advertisements